पैक्सों में अब डेयरी को मिलेगा बढ़ावा – पहले चरण में 2265 पैक्सों में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन
प्रस्तावना
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। कृषि के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के बड़े अवसर हैं। अब सरकार का ध्यान प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को बहुउद्देश्यीय बनाने पर है। हाल ही में घोषणा की गई है कि पहले चरण में 2265 पैक्सों में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन की सुविधा शुरू की जाएगी।
यह कदम न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगा। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि पैक्स क्या है, सरकार की यह नई योजना कैसे काम करेगी, इसका किसानों और युवाओं पर क्या असर होगा और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्या बदलाव आएगा।
पैक्स (PACS) क्या है?
- पैक्स का पूरा नाम – Primary Agricultural Credit Society (प्राथमिक कृषि ऋण समिति)।
- यह एक सहकारी संस्था है जो गांव या पंचायत स्तर पर किसानों को ऋण, बीज, उर्वरक, कृषि उपकरण आदि उपलब्ध कराती है।
- PACS का नेटवर्क पूरे भारत में फैला है और ये ग्रामीण बैंकिंग व कृषि विकास की रीढ़ मानी जाती हैं।
- अब इन्हें बहुउद्देश्यीय (multi-purpose) इकाई बनाने का काम चल रहा है ताकि केवल कृषि ऋण तक सीमित न रहकर, डेयरी, मछली पालन, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण जैसी गतिविधियाँ भी शामिल हो सकें।
योजना का उद्देश्य
इस पहल के पीछे सरकार का मुख्य लक्ष्य है:
- किसानों की आमदनी बढ़ाना – कृषि के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन से अतिरिक्त आय।
- ग्रामीण युवाओं को रोजगार – डेयरी और फिशरी प्रोजेक्ट से बड़े पैमाने पर नौकरियाँ।
- पैक्स को बहुउद्देश्यीय बनाना – पैक्स के पास पहले से ही बुनियादी ढांचा और किसानों का विश्वास है।
- स्थानीय स्तर पर डेयरी और फिशरी यूनिट स्थापित करना – ताकि ग्रामीण उत्पाद का स्थानीय स्तर पर ही मूल्य संवर्धन हो सके।
पहले चरण में 2265 पैक्स क्यों?
भारत में लाखों पैक्स हैं, लेकिन सरकार ने पहले चरण में 2265 पैक्सों का चयन किया है।
- इन पैक्सों को डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
- चयनित पैक्स में इन्फ्रास्ट्रक्चर, कोल्ड स्टोरेज, फीड मैनेजमेंट और प्रोसेसिंग यूनिट जैसी सुविधाएँ विकसित होंगी।
- धीरे-धीरे इस योजना को अन्य पैक्स तक बढ़ाया जाएगा।
डेयरी सेक्टर को बढ़ावा
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी सेक्टर अभी भी असंगठित है।
- पैक्स के माध्यम से स्थानीय दूध संग्रहण केंद्र बनाए जाएंगे।
- किसानों को आधुनिक तकनीक और नस्ल सुधार की जानकारी दी जाएगी।
- पैक्स दूध प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी ले सकेगा।
- इससे मिडलमैन का रोल कम होगा और किसानों को सही दाम मिलेगा।
मत्स्य पालन (फिशरी) में अवसर
भारत में मत्स्य पालन की बहुत संभावनाएँ हैं, खासकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में।
- पैक्स के माध्यम से तालाब निर्माण, मछली बीज वितरण, आहार, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग की सुविधाएँ दी जाएँगी।
- मत्स्य पालन में कम लागत और जल्दी रिटर्न की वजह से यह किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प है।
- सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी और प्रशिक्षण भी दे रही है।
पशुपालन के फायदे
- किसानों को अतिरिक्त आय के साथ-साथ जैविक खाद (गोबर खाद) भी मिलेगा।
- डेयरी, पोल्ट्री और बकरी पालन जैसी गतिविधियाँ पैक्स से जुड़ने पर बड़े स्तर पर हो सकेंगी।
- पैक्स के माध्यम से किसानों को टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य, बीमा और फीड मैनेजमेंट की सुविधा मिलेगी।
योजना के तहत मिलने वाली सुविधाएँ
इस योजना में पैक्स और किसानों को कई तरह की सुविधाएँ दी जाएंगी:
- आधुनिक उपकरण और मशीनरी – दूध चिलिंग प्लांट, पैकेजिंग यूनिट, फीड मशीन आदि।
- ब्याज सब्सिडी और सस्ती ऋण सुविधा – पैक्स के माध्यम से किसानों को आसान ऋण।
- मार्केटिंग और ब्रांडिंग सपोर्ट – उत्पाद को बड़े बाजार तक पहुँचाने की व्यवस्था।
- प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग – किसानों को नई तकनीक का प्रशिक्षण।
किसानों को क्या लाभ होगा?
- अतिरिक्त आय – केवल खेती पर निर्भर रहने के बजाय डेयरी और मत्स्य पालन से भी कमाई।
- उत्पाद का उचित दाम – पैक्स सीधे संग्रह और प्रोसेसिंग करेगा।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार – गांव में ही काम के अवसर।
- महिलाओं की भागीदारी – डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर में महिलाओं की बड़ी भूमिका होगी।
सरकार की योजना से जुड़े आँकड़े और बजट
- सरकार ने इस परियोजना के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
- पैक्स को डेयरी और फिशरी के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रांट और लोन सुविधा दी जाएगी।
- राज्य सरकारें और सहकारी समितियाँ मिलकर इस योजना को लागू करेंगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव
- पैक्स के माध्यम से गांव से शहर तक सप्लाई चेन मजबूत होगी।
- स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
- ग्रामीण पलायन रुकेगा, क्योंकि गांव में ही रोजगार के अवसर बनेंगे।
- कृषि आधारित इंडस्ट्री का विकास – डेयरी और फिशरी यूनिट से ग्रामीण उद्योग को बढ़ावा।
पैक्स में डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े ताज़ा आँकड़े (2025 के अनुमान अनुसार)
भारत में PACS की कुल संख्या: लगभग 1 लाख से अधिक, जिनमें से बिहार में करीब 8,400 पैक्स सक्रिय हैं।
पहले चरण में चयनित पैक्स: 2,265 पैक्स (सभी राज्यों से चयनित, सबसे ज्यादा पैक्स बिहार और उत्तर प्रदेश से)।
डेयरी सेक्टर के आँकड़े:
भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक – सालाना उत्पादन लगभग 230 मिलियन टन (2024)।
दूध उत्पादन में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और बिहार शीर्ष राज्यों में।
डेयरी सेक्टर से जुड़े 8 करोड़ से अधिक लोग, जिनमें 70% महिलाएँ।
मत्स्य पालन के आँकड़े:
भारत विश्व में तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश।
सालाना उत्पादन – 168 लाख टन (2024)।
देश की GDP में मत्स्य पालन का योगदान – 1.2%।
पशुपालन (बकरी, पोल्ट्री, डेयरी):
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन GDP का 28% योगदान करता है।
भारत में पोल्ट्री उद्योग 12% सालाना की दर से बढ़ रहा है।
> ये आँकड़े यह दिखाते हैं कि डेयरी, मत्स्य और पशुपालन में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कई गुना बढ़ाने की क्षमता है, और PACS का नेटवर्क इसका सबसे मजबूत माध्यम बन सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. पैक्स (PACS) क्या है?
उत्तर: पैक्स यानी Primary Agricultural Credit Society, एक सहकारी समिति है जो पंचायत या गांव स्तर पर किसानों को ऋण, उर्वरक, बीज, उपकरण और अन्य कृषि सेवाएँ उपलब्ध कराती है।
2. 2265 पैक्स में डेयरी योजना कब शुरू होगी?
उत्तर: पहले चरण में चयनित 2265 पैक्स में डेयरी, मत्स्य और पशुपालन से जुड़ी गतिविधियाँ 2025 से चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगी।
3. इस योजना का किसानों को क्या लाभ होगा?
उत्तर: किसानों को अतिरिक्त आय, आसान ऋण, प्रशिक्षण, मार्केटिंग सपोर्ट, और डेयरी व फिशरी उत्पाद के लिए उचित मूल्य मिलेगा।
4. क्या महिला किसानों को भी इस योजना का फायदा मिलेगा?
उत्तर: हाँ, डेयरी और पोल्ट्री में महिलाओं की भागीदारी ज्यादा है। सरकार और पैक्स इनके लिए विशेष प्रशिक्षण और सेल्फ-हेल्प ग्रुप के जरिए सहयोग देंगी।
5. क्या इसके तहत ऋण और सब्सिडी भी मिलेगी?
उत्तर: हाँ, पैक्स के माध्यम से किसानों को डेयरी व फिशरी प्रोजेक्ट के लिए कम ब्याज दर पर ऋण और सरकार की ओर से सब्सिडी मिलेगी।
6. क्या सिर्फ डेयरी ही होगी या अन्य गतिविधियाँ भी होंगी?
उत्तर: इसके तहत डेयरी, मत्स्य पालन, पोल्ट्री, बकरी पालन और फीड मैनेजमेंट जैसी कई गतिविधियाँ शामिल हैं।
7. योजना में शामिल होने के लिए आवेदन कैसे करें?
उत्तर: अपने नजदीकी पैक्स या सहकारी बैंक में संपर्क करें। वहां आपको प्रशिक्षण और योजना से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
8. क्या पैक्स में डेयरी उत्पाद की मार्केटिंग भी होगी?
उत्तर: हाँ, पैक्स दूध संग्रहण, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बड़े बाजारों में आपूर्ति का काम भी करेगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
निष्कर्ष
पैक्स को डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन से जोड़ने की योजना ग्रामीण भारत के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। पहले चरण में 2265 पैक्सों का चयन एक बड़ा कदम है। इस योजना से किसानों को नया बाजार, बेहतर कीमत और स्थायी रोजगार मिलेगा।
भविष्य में जब सभी पैक्स इस तरह बहुउद्देश्यीय बनेंगे, तब भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा।
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