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हर वर्ष, दीवाली के मौके पर घरों में रोशनी और उल्लास की खुमारी छा जाती है। लेकिन इस साल—अक्टूबर 2025 में मनाए जाने वाले दीवाली पर्व पर—सरकार एक और "दोहरी खुशी" लाने की तैयारी में है।
15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक घोषणा की: “Next-Generation GST सुधार” को दीवाली तक लागू किया जाएगा, ताकि आम जनता, MSMEs और व्यवसायों को टैक्स दबाव से राहत मिल सके। इसे उन्होंने एक “Diwali gift” करार दिया।
सरकार वर्तमान GST स्लैब—5%, 12%, 18%, 28%—को कम कर सिर्फ दो (या तीन) मुख्य स्लैब में बदलने जा रही है, ताकि कर संरचना सरल बने और घरेलू मांग को बढ़ावा मिले।
GST के मौजूदा स्लैब और classification की जटिलता के कारण व्यापारी और MSMEs को भारी compliance बोझ झेलना पड़ता है।
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, महंगाई और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच घरेलू खपत को गति देना आवश्यक हो गया था।
सरकार को लगा कि कर दरों में कटौती—विशेषकर रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं पर—उपभोक्तावाद को बढ़ावा देगी और राजस्व हानि को लंबे समय में अधिक compliance से पूरा किया जा सकेगा।
5% स्लैब: लगभग 99% वस्तुएँ जो 12% पर थीं, अब 5% में आ सकती हैं।
18% स्लैब: लगभग 90% वस्तुओं को जो पहले 28% पर थीं, अब 18% में लाया जा रहा है।
40% स्लैब: "sin/luxury" वस्तुओं (जैसे तंबाकू, ऑनलाइन गेमिंग) पर कट्टर दरें बनी रहेंगी।
सरकार ने एक तीन-स्तरीय सुधार ढांचा पेश किया है:
Structural Reforms — inverted duty structure, classification विवादों को हल करना
Rate Rationalisation — स्लैब घटाकर दो करना, स्थिरता लाना
Ease of Living — ई-रिटर्न, प्री-फिल्ड फॉर्म, तेज़ रिफंड, संचालकों का compliance आसान करना
जीवन-चर्या में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं (खाद्य पदार्थ, संजीवनी उत्पाद, दैनिक आवश्यकता की वस्तुएँ) पर कर में कटौती होने से कीमतें कम होंगी—उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा।
सरल अनुपालन प्रणाली से MSMEs को राहत मिलेगी, और कर दरों में स्पष्टता और स्थिरता से व्यवसाय करने में आसानी होगी।
Citi की गणना के अनुसार, यदि वस्तुओं को 12% से 5% या 18% पर लाया जाता है, तो यह ₹50,000 करोड़ तक का राजस्व हानि हो सकता है—जो GDP का लगभग 0.15% है। लेकिन घरेलू घरों को मिलने वाला प्रोत्साहन इस वित्त वर्ष में 0.6–0.7% GDP तक पहुँच सकता है।
ऐसी घोषणाएँ बाज़ारों में सकारात्मक माहौल उत्पन्न कर सकती हैं, क्योंकि उपभोक्ता खर्च में वृद्धि होगी, जिसे निवेशक सकारात्मक संकेत मानते हैं।
कांग्रेस ने दावा किया कि GST-2.0 उनके चुनाव घोषणापत्र और राहुल गांधी के 2018 ट्वीट्स पर आधारित है। उन्होंने सरकार से एक आधिकारिक चर्चा-पत्र जारी करने की मांग की, जिससे राज्यों की स्वायत्ता सुरक्षित रहे और संघात्मक संतुलन बना रहे।
CII (Confederation of Indian Industry) ने इस सुधार को 'visionary' बताया, जो कर प्रणाली में स्पष्टता, सरलता और अनुपालन क्षमता लाएगा।
Compensation cess मार्च 2026 में समाप्त हो रहा है, जिसने वित्त मंत्रालय को अतिरिक्त खर्च सहने की सुविधा दी है।
Finance Ministry ने सुधारों पर Group of Ministers (GoM) को प्रस्ताव भेजा है—जिसे सितंबर में GST Council की बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा।(
भले ही इस सिंहावलोकन से तत्काल राजस्व प्रभावित हो, लेकिन बेहतर compliance, बढ़ी मांग और उन्नत कर संरचना से इसे लंबी अवधि में स्थिर और समृद्ध कर व्यवस्था में परिवर्तित किया जा सकता है।
उत्तर: प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2025 को घोषणा की कि ये Next-Generation GST सुधार अक्टूबर 2025 की दीवाली तक लागू किए जाएंगे—इसकी औपचारिक घोषणा या स्वरूप जल्द ही हो सकती है।
उत्तर: वर्तमान में चार GST स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को दो मुख्य स्लैब में समाहित किया जाएगा—5% और 18%, साथ ही बाक़ी “सिन/लक्ज़री” वस्तुओं के लिए 40% विशेष दर प्रस्तावित है।
उत्तर: लगभग 99% आइटम जो 12% स्लैब में थे, अब 5% स्लैब में आ सकते हैं। वहीं बहुत से 28% वाले आइटम—जैसे टीवी, फ्रिज, AC, सीमेंट आदि—18% तक ला जाएँगे।
उत्तर: सुधारों से रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं पर कर कम होगा, जिससे उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा और घरेलू मांग को बढ़ावा मिलेगा। MSMEs और छोटे व्यवसायों को भी compliance बोझ में राहत मिलेगी।
उत्तर: मौजूदा प्रतिस्थापित प्रणाली जटिल स्लैब, classification विवाद, और inverted duty संरचना के कारण अनुपालन बोझ बढ़ा रहा था। इन सुधारों का उद्देश्य कर दरों की स्पष्टता, स्थिरता, और compliance को आसान बनाना है।
उत्तर: अगर 12% वस्तुएँ 5% और कुछ 18% स्लैब में शिफ्ट हुईं, तो अनुमानित राजस्व हानि लगभग ₹500 अरब (₹50,000 करोड़) हो सकती है, जो GDP का लगभग 0.15% है। लेकिन घरेलू परिवारों को मिलने वाला प्रोत्साहन 2025-26 में GDP का 0.6–0.7% हो सकता है।
उत्तर: कांग्रेस ने दावा किया है कि यह विचार पहले उनके चुनावी घोषणापत्र और राहुल गांधी के 2018 के ट्वीट में था, और सुधारों के लिए सरकारी चर्चा-पत्र की मांग की है।
उत्तर: Finance Ministry ने Group of Ministers (GoM) को प्रस्ताव भेज दिया है, और GST Council की अगली बैठक—संभवतः सितंबर या अक्टूबर में—उसमें इस सुधार पर अंतिम निर्णय लेगी।
उत्तर: हां, सरकार का लक्ष्य है—2047 तक एकल GST दर (single tax slab) तक पहुँचना, जिससे कर व्यवस्था और भी सरल और स्थिर हो।
| प्रश्न | संक्षिप्त उत्तर |
|---|---|
| लागू होने की समयसीमा | दीवाली (अक्टूबर 2025) तक |
| स्लैब संरचना | 5%, 18%, और विशेष 40% |
| सस्ती होने वाली वस्तुएँ | 12% से अधिकांश 5%, 28% से अधिकांश 18% में |
| लाभार्थी | आम उपभोक्ता, MSMEs, घरेलू खपत, आसान अनुपालन |
| उद्देश्य | कर प्रणाली को सरल बनाना, compliance आसान करना, inverted duty समस्या का समाधान |
| वित्तीय प्रभाव | राजस्व हानि ~0.15% GDP, घरेलू प्रोत्साहन 0.6–0.7% GDP |
| राजनीतिक प्रतिक्रिया | कांग्रेस की दावा और चर्चा-पत्र की मांग |
| प्रक्रिया | GoM प्रस्ताव, GST Council निर्णय अगले महीने में |
| दीर्घकालिक लक्ष्य | 2047 तक एकल GST दर संरचना |
GST की यह अगली पीढ़ी—GST 2.0—केवल कर दरों में कटौती नहीं, बल्कि हमारी कर व्यवस्था का पुनराकल्प और सरलता की ओर एक साहसिक कदम है। यह घरेलू खपत को बढ़ावा, MSMEs को राहत, और अनुपालन को आसान बनाएगा। एक “दोहरी दीवाली” तोहफा, जो अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम आदमी की खुशियों में भी चार-चाँद लगाएगा।
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